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गरुण पुराण के अनुसार हमें गाली क्यों नहीं देनी चाहिए (Why we should not abuse)

गरुण पुराण के अनुसार हमें गाली क्यों नहीं देनी चाहिए (Why we should not abuse)

आज के समय में काफी लोगो के लिए गाली देना एक आदत सी बन चुकी है और उनके लिए हर छोटी बात में गाली देना एक साधारण सी बात है चाहे व्यक्ति खुश हो या दोस्तों के साथ हो गाली देना तो जैसे उसकी एक आदत बन गयी है|
क्या आपको पता है गाली देना अपमानजनक होता है इससे व्यक्ति के स्तर का पता चलता है गाली देने वाला व्यक्ति यह भी परिचय देता है की उसे उसके घर वालो ने उसे कैसे संस्कार और शिक्षा दी है| फिर भी गाली देते समय व्यक्ति इन सब बातो को अलग रखकर कुछ भी नहीं सोचता है|
जब भी हम किसी से बात करते है तो वह सिर्फ हमारा बात करना नहीं बल्कि हमारा पूर्ण परिचय होता है गाली सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता है लेकिन मनुष्य गुस्से में इतना पागल हो जाता है कि उसका अपने शब्दों पर से ही नियन्त्रण खो जाता है और उसे पता ही नहीं होता की वह क्या बोल रहा है|
आज के समय में गाली देना मनुष्य की भाषाशैली का हिस्सा बन चुका है दुनिया में ऐसी कोई जनजाति नहीं है जहाँ गाली नहीं दी जाती है|

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गरुण पुराण के अनुसार हमें गाली क्यों नहीं देनी चाहिए (Why we should not abuse)
गरुण पुराण के अनुसार हमें गाली क्यों नहीं देनी चाहिए (Why we should not abuse)

एक शोध के अनुसार यह पाया गया की गाली देने से किसी भी समस्या को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है या गाली देने से मनुष्य अधिक हिम्मत से जीवन में आने वाली कठिनाईयों का सामना कर सकता है लेकिन इस शोध का उदहारण  देते हुए गाली देना या अपशब्द बोलना व्यक्ति के अच्छे संस्कारो का परिचय नहीं देता हैं|

गरुण पुराण के अनुसार गाली देना किसी को शारीरिक रूप से प्रताडित करने से कम नहीं है गाली देना एक मौखिक हिंसा है जब हम किसी को गाली देते है तो हम दूसरे व्यक्ति पर अपनी जीवा से प्रहार करते है|
गाली देने से व्यक्ति की भाषा और उसका स्तर भी गिर जाता है औरगाली देने से मनुष्य के अभद्र होने का पता भी चलता है|
अगर हम किसी भी व्यक्ति को गाली देंगे वह व्यक्ति जरूर ही आपको अपशब्द बोलेगा जिससे हमारे सम्बन्ध उस व्यक्ति से खत्म होने की सम्भावना बढ़ जाती है और हमारा मस्तिस्क ऐसी स्थिति में  चला जाता है कि हम उस व्यक्ति के लिए ओर भी बुरा सोचेने लगते है जिससे हमारे मन में हिंसा का भाव ओर भी ज्यादा बढ़ जाता है जैसा की हम सभी जानते है कि हिंसा बहुत सी गलत चीजों को परिणाम दे सकती है|
गाली देने से हमारे ऊपर नकारात्मक प्रभाव तो होता ही है साथ में हमें दूसरो की बदुआयें भी लेते है इसलिए हमें अपने अच्छे के लिए गाली नहीं देनी चाहिए|

गरुण पुराण में कई नरको का वर्णन मिलता है जिनमे से एक अप्रतिष्ठ नर्क है जो लोग धार्मिक मनुष्यों या ब्राह्मणों को सताते है या फिर उन्हें गालियाँ देते है ऐसे लोगो को अप्रतिष्ठ नर्क भोगना पड़ता है अप्रतिष्ठ नर्क मूत्र, पश और उलटी से भरा हुआ बताया गया है|
यदि आप उन लोगो में से है जो गाली देना पसन्द नहीं करते और आपमें इतना धैर्य, शक्ति और सयम है की आप पर दूसरो की गालियों प्रभाव नहीं होता है तो कोई भी व्यक्ति आपका बिगड़ सकता|

एक बार गौतम बुद्ध एक गॉव की तरफ जा रहे थे तब रास्ते में कुछ लोगो ने उन्हें गालिया देना शुरू कर दिया जब वह सब चुप हो गए तब गौतम बुद्ध ने पूछा अगर आप लोगो की बात खत्म हो गयी हो तो क्या मै जा सकता हो तब लोगो ने कहा हमने तुमको गालिया दी है क्या तुम पर इसका कोई असर नहीं हुआ तब गौतम बुद्ध ने बोला मुझे कोई भी तब तक कोई कुछ नहीं दे सकता जब तक मै उसे स्वीकार न करो और तुम्हारी दी गयी गालियाँ मैंने स्वीकार ही नहीं की तो इन गालियों का मुझ पर प्रभाव ही नहीं होगा अब इन गालियों को तुम लोग अपंने साथ घर ले जाओगे और अपने परिवार के साथ बांटोगे|
इस कहानी से गौतम बुद्ध ने बहुत ही तार्किक तथ्य दिया है हम सभी को इस बात पर विचार करना चाहिए|

अतः हमें अपनी वाणी पर सयम रखना चाहिए और यदि कोई आपको गाली देता है तो अगर आप उसको कोई प्रत्रिक्रिया नहीं देंगे तो वह खुद ही अपने आप चुप हो जाएगा| अकसर गाली देने वाले लोग हमसे प्रत्रिक्रिया चाहते है हमें ऐसे लोगो कको शांत होकर जवाब देना चाहिए|

महान सन्त कबीरदास जी कहते है
ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोये |
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ||
आपकी शीतल वाणी दूसरो को जीवन भर के लिए सीख दे सकती है|

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